दावा ये हैं की शातिर हैं हम
सच तो ये हैं की शाइर हैं हम
चारागर से दुरुस्त ना होगा
मसला ये हैं की काफिर हैं हम
खुद पे खुलते ही तो नइ हम पर
पूरे जग पे तो जाहिर हैं हम
यूँ तो मौजुद हूँ हर ज़ेहन में
लेकिन खुद से तो बाहिर हैं हम
@ दुर्गेश लौहार
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