Wednesday, 30 August 2017

ग़ज़ल


किस किस ने यह सोचा होगा ?
ये   भी   ग़ज़लें  कहता  होगा

दस  घण्टे  की  ड्यूटी   करके
फिर  ग़ालिब को  पढ़ता होगा

मिट्टी   की   खुशबू  लेकर  के
मन  ही  मन  में  हँसता  होगा

बाहर    बाहर   हँसने    वाला
अंदर     अंदर    टूटा    होगा

हीरो    जैसा    दिखने   वाला
लड़का क्या-क्या सहता होगा

एक सयानी  लड़की  हैं  बस
उसको  पागल  करता  होगा

दस  दस के कमरे में हर दिन
सँग  उसके  क्या  होता होगा ?

तुमको  कुछ  मालूम नही  हैं
कैसे   तनहा    सोता    होगा

-दुर्गेश

30/08/2017